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Thursday, May 20, 2010
गांधीजी के प्रथम आलोचकों में से थे बिपिन चंद्र पाल
बिपिन चंद्र पाल क्रांतिकारी तिकड़ी ‘लाल’ ‘बाल’ ‘पाल’ के अहम किरदार थे जिन्होंने ब्रितानिया हुकूमत की चूलें हिलाकर रख दी थीं। उन्हें गांधी जी के प्रथम आलोचकों में से एक माना जाता है।बिपिन चंद्र पाल का जन्म सात नवम्बर 1858 को हबीबगंज जिले के पोइल गांव में हुआ था जो वर्तमान में बांग्लादेश में पड़ता है। वह एक शिक्षक पत्रकार लेखक और मशहूर वक्ता होने के साथ ही एक क्रांतिकारी भी थे जिन्होंने लाला लाजपत राय :लाल: और बाल गंगाधर तिलक :बाल: के साथ मिलकर अंग्रेजी शासन से जमकर संघर्ष लिया।इतिहासकार सर्वदानंदन के अनुसार इन तीनों क्रांतिकारियों की जोड़ी आजादी की लड़ाई के दिनों में ‘लाल’ ‘बाल’ ‘पाल’ के नाम से मशहूर थी। इन्हीं तीनों ने सबसे पहले 1905 में अंग्रेजों के बंगाल विभाजन का जमकर विरोध किया और इसे एक बड़े आंदोलन का रूप दे दिया।पाल राष्ट्रवादी पत्रिका ‘वंदे मातरम’ के संस्थापक भी थे। उन्होंने जब एक विधवा को अपनी जीवनसंगिनी बनाया तो घरवालों से उन्हें जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा।बाल गंगाधर तिलक की 1907 में गिरफ्तारी और ब्रिटिश सरकार द्वारा दमन की कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद वह इंग्लैण्ड चले गए जहां वह ‘इंडिया हाउस’ से जुड़े और ‘स्वराज’ पत्रिका की स्थापना की। हालांकि 1909 में मदन लाल ढींगरा द्वारा कर्जन वाइली को मौत के घाट उतार दिए जाने के बाद यह पत्रिका बंद हो गई।पत्रिका के बंद हो जाने से पाल को लंदन में मानसिक तनाव के दौर से गुजरना पड़ा और नतीजतन वह ‘कट्टर चरण’ से पूरी तरह दूर हो गए। उन्होंने आजाद देशों का एक संघ बनाने की परिकल्पना का सूत्रपात किया जो किसी एक देश की सीमा से काफी परे हो। पाल गांधी जी की सबसे पहले आलोचना करने वालों में शामिल थे। जब गांधी जी भारत पहुंचे तब भी उन्होंने उनकी आलोचना जारी रखी। 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में अपने अध्यक्षीय भाषण में पाल ने गांधी जी की खुलेआम तीखी आलोचना की।उन्होंने गांधी जी की आलोचना करते हुए कहा ‘‘आप जादू चाहते हैं । मैंने आपको तर्क देने की कोशिश की । आप मंत्रम चाहते हैं मैं कोई ऋषि नहीं हूं जो मंत्रम दे सकूं..जब मैं सच जानता हूं तो मैंने कभी आधा सच नहीं बोला ।’’ इसके लिए पाल को भी राष्ट्रवादियों की आलोचना का शिकार होना पड़ा ।पाल 1922 में राजनीतिक जीवन से अलग हो गए और फिर कभी इस तरफ मुड़कर नहीं देखा । 20 मई 1932 को उनका निधन हो गया ।प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1958 में पाल की जन्मशती पर उन्हें ऐसा महान व्यक्ति करार दिया जिसने राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में उच्चस्तरीय भूमिका निभाई । पाल को भारत में ‘क्रांतिकारी विचारों का जनक’ भी कहा जाता है ।
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Sunday, May 31, 2009
कभी साथ नहीं बैठ पाया गांधी का परिवार
कभी साथ नहीं बैठ पाया गांधी का परिवार
मोहनदास करमचंद गांधी और कस्तूर बाई के खून से पैदा हुई संतति की संख्या बढ़कर सौ के पार हो चुकी है लेकिन इस खानदान की मौजूदा पीढ़ी को अब तक एक भी ऐसा मौका मयस्सर नहीं हो सका है कि वे एक साथ जुट सके। तारा से लेकर तुषार तक परिवार के सदस्यों को इसका मलाल भी है।महात्मा गांधी के दूसरे पुत्र मणिलाल गांधी के पौत्र तुषार गांधी ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, 'यह नहीं हो पाया है। परिवार इतना फैल चुका है कि उसे एक साथ कर पाना मुश्किल हो गया है।'उन्होंने बताया कि बापू और बा के चार पुत्रों हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास के पुत्र-पुत्रियों का वंश अब सौ से ऊपर हो चुका है और इस खानदान के कुल 130 सदस्य हिन्दुस्तान के अलावा दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया आदि देशों में रह रहे हैं।इसी संदर्भ में गांधी के तीसरे पुत्र देवदास गांधी की ज्येष्ठ पुत्री तारा भट्टाचार्य ने कहा, 'हमारी मर्जी तो बहुत है कि हमें मिलना चाहिए लेकिन हम सब अपने-अपने क्षेत्रों में लगे हैं। इस बारे में सोच भी है कि सभी इकट्ठा हों लेकिन हो नहीं पाया है।'कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक न्यास की उपाध्यक्ष तारा ने बताया कि इस बारे में कोशिश की जा रही है और उन्हें उम्मीद है कि साल के अंत में ऐसा कोई समागम हो पाएगा। उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वालों को जुटा पाना संभव नहीं हो पा रहा है लेकिन भारत में रहने वाले लोग समय-समय पर मिलते रहते हैं और हम लोग खुश होते हैं।'करमचंद गांधी और पुतली बाई के सबसे छोटे पुत्र मोहन दास का विवाह मात्र 13 साल की उम्र में कस्तूरबा से हो गया था और उनके चार पुत्र हुए और उसके बाद यह खानदान लगातार बढ़ा है। महात्मा ने हालांकि भारतीय आजादी की लड़ाई की कमान संभालने से पहले 1914 में ही परिवार का परित्याग कर दिया था और सभी भारतीयों को अपना मानस पुत्र मान लिया था लेकिन गांधी के सबसे बड़े पुत्र हरिलाल की चार संतानें हुईं और उनकी सबसे बड़ी पुत्री नीलम पारिख पिछले साल मुंबई में गांधी के अस्थि कलश विसर्जन में शामिल हुईं। महात्मा के सबसे बड़े पुत्र से मेल न खाने की बात सभी लोगों को पता है और उन्होंने खुद लिखा भी है, 'मेरे जीवन के दो सबसे बड़े खेद... दो लोगों को मैं कभी रजामंद नहीं कर सका.. मेरे मुस्लिम दोस्त मोहम्मद अली जिन्ना और मेरे अपने पुत्र हरिलाल गांधी।' नीलम ने अपने पिता पर एक पुस्तक भी लिखी है, 'महात्मा गांधीज लास्ट ट्रेजर, हरिलाल गांधी' जिसमें इस बात पर कुछ रोशनी डाली गई है।गांधी के दूसरे पुत्र मणिलाल गांधी के एक पुत्र अरूण गांधी और दो पुत्रियां सीता और इला हुईं। अरूण हाल के दिनों में विवादों में भी घिर गए थे जब उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट वेबसाइट पर एक आलेख प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने यहूदियों और इस्राइल के बारे में कुछ टिप्पणी की। इस विवाद के बाद उन्हें अमेरिका के रोचेस्टर विश्वविद्यालय में उनके द्वारा स्थापित महात्मा गांधी शांति पीठ से इस्तीफा देना पड़ा।अरूण गांधी के ही पुत्र तुषार गांधी हैं जो फिलहाल कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं और पेशे से बैंकर हैं। वह सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में लगे हैं।महात्मा के तीसरे पुत्र रामदास की पुत्री सुमित्रा गांधी कुलकर्णी राज्यसभा (1972 से 1976) की सदस्य रहीं और आपातकाल के मुद्दे पर इंदिरा गांधी से उनका मतभेद हुआ। उन्होंने गांधी पर एक पुस्तक 'अनमोल विरासत' लिखी और देश के राष्ट्रपति पद के चुनाव में उतर कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का प्रयास भी किया।गांधी के सबसे छोटे पुत्र देवदास गांधी खुद हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक रहे और उन्हें कभी-कभार बापू के निजी सहायक के तौर पर साबरमती आश्रम में काम करने का भी मौका मिला। देवदास के एक पुत्र गोपाल कृष्ण गांधी मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं और उन्होंने पूर्व में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के तौर पर विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों में काम किया जिसमें श्रीलंका भी शामिल है जहां से उन्होंने अवकाश ग्रहण किया।देवदास गांधी के एक अन्य पुत्र राजमोहन गांधी भी राज्यसभा के दो साल तक सदस्य रहे और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा। राजमोहन ने कई पुस्तकें भी लिखीं हैं। उनके सबसे छोटे भाई रामचंद्र गांधी पिछले साल जून में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मृत पाए गए थे जो पेशे से दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे और फक्कड़ी उनके मिजाज में थी। गांधी खानदान की अब पांचवीं छठीं पीढ़ी पैदा हो चुकी है और 'महात्मा गांधी हिज अपोस्टल्स' पुस्तक के लेखक वेद प्रकाश मेहता के अनुसार गांधी खानदान के लोग कई देशों में जीवन बीमा बेचने से लेकर अंतरिक्ष इंजीनियरिंग तक के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
मोहनदास करमचंद गांधी और कस्तूर बाई के खून से पैदा हुई संतति की संख्या बढ़कर सौ के पार हो चुकी है लेकिन इस खानदान की मौजूदा पीढ़ी को अब तक एक भी ऐसा मौका मयस्सर नहीं हो सका है कि वे एक साथ जुट सके। तारा से लेकर तुषार तक परिवार के सदस्यों को इसका मलाल भी है।महात्मा गांधी के दूसरे पुत्र मणिलाल गांधी के पौत्र तुषार गांधी ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, 'यह नहीं हो पाया है। परिवार इतना फैल चुका है कि उसे एक साथ कर पाना मुश्किल हो गया है।'उन्होंने बताया कि बापू और बा के चार पुत्रों हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास के पुत्र-पुत्रियों का वंश अब सौ से ऊपर हो चुका है और इस खानदान के कुल 130 सदस्य हिन्दुस्तान के अलावा दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया आदि देशों में रह रहे हैं।इसी संदर्भ में गांधी के तीसरे पुत्र देवदास गांधी की ज्येष्ठ पुत्री तारा भट्टाचार्य ने कहा, 'हमारी मर्जी तो बहुत है कि हमें मिलना चाहिए लेकिन हम सब अपने-अपने क्षेत्रों में लगे हैं। इस बारे में सोच भी है कि सभी इकट्ठा हों लेकिन हो नहीं पाया है।'कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक न्यास की उपाध्यक्ष तारा ने बताया कि इस बारे में कोशिश की जा रही है और उन्हें उम्मीद है कि साल के अंत में ऐसा कोई समागम हो पाएगा। उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वालों को जुटा पाना संभव नहीं हो पा रहा है लेकिन भारत में रहने वाले लोग समय-समय पर मिलते रहते हैं और हम लोग खुश होते हैं।'करमचंद गांधी और पुतली बाई के सबसे छोटे पुत्र मोहन दास का विवाह मात्र 13 साल की उम्र में कस्तूरबा से हो गया था और उनके चार पुत्र हुए और उसके बाद यह खानदान लगातार बढ़ा है। महात्मा ने हालांकि भारतीय आजादी की लड़ाई की कमान संभालने से पहले 1914 में ही परिवार का परित्याग कर दिया था और सभी भारतीयों को अपना मानस पुत्र मान लिया था लेकिन गांधी के सबसे बड़े पुत्र हरिलाल की चार संतानें हुईं और उनकी सबसे बड़ी पुत्री नीलम पारिख पिछले साल मुंबई में गांधी के अस्थि कलश विसर्जन में शामिल हुईं। महात्मा के सबसे बड़े पुत्र से मेल न खाने की बात सभी लोगों को पता है और उन्होंने खुद लिखा भी है, 'मेरे जीवन के दो सबसे बड़े खेद... दो लोगों को मैं कभी रजामंद नहीं कर सका.. मेरे मुस्लिम दोस्त मोहम्मद अली जिन्ना और मेरे अपने पुत्र हरिलाल गांधी।' नीलम ने अपने पिता पर एक पुस्तक भी लिखी है, 'महात्मा गांधीज लास्ट ट्रेजर, हरिलाल गांधी' जिसमें इस बात पर कुछ रोशनी डाली गई है।गांधी के दूसरे पुत्र मणिलाल गांधी के एक पुत्र अरूण गांधी और दो पुत्रियां सीता और इला हुईं। अरूण हाल के दिनों में विवादों में भी घिर गए थे जब उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट वेबसाइट पर एक आलेख प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने यहूदियों और इस्राइल के बारे में कुछ टिप्पणी की। इस विवाद के बाद उन्हें अमेरिका के रोचेस्टर विश्वविद्यालय में उनके द्वारा स्थापित महात्मा गांधी शांति पीठ से इस्तीफा देना पड़ा।अरूण गांधी के ही पुत्र तुषार गांधी हैं जो फिलहाल कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं और पेशे से बैंकर हैं। वह सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में लगे हैं।महात्मा के तीसरे पुत्र रामदास की पुत्री सुमित्रा गांधी कुलकर्णी राज्यसभा (1972 से 1976) की सदस्य रहीं और आपातकाल के मुद्दे पर इंदिरा गांधी से उनका मतभेद हुआ। उन्होंने गांधी पर एक पुस्तक 'अनमोल विरासत' लिखी और देश के राष्ट्रपति पद के चुनाव में उतर कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का प्रयास भी किया।गांधी के सबसे छोटे पुत्र देवदास गांधी खुद हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक रहे और उन्हें कभी-कभार बापू के निजी सहायक के तौर पर साबरमती आश्रम में काम करने का भी मौका मिला। देवदास के एक पुत्र गोपाल कृष्ण गांधी मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं और उन्होंने पूर्व में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के तौर पर विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों में काम किया जिसमें श्रीलंका भी शामिल है जहां से उन्होंने अवकाश ग्रहण किया।देवदास गांधी के एक अन्य पुत्र राजमोहन गांधी भी राज्यसभा के दो साल तक सदस्य रहे और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा। राजमोहन ने कई पुस्तकें भी लिखीं हैं। उनके सबसे छोटे भाई रामचंद्र गांधी पिछले साल जून में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मृत पाए गए थे जो पेशे से दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे और फक्कड़ी उनके मिजाज में थी। गांधी खानदान की अब पांचवीं छठीं पीढ़ी पैदा हो चुकी है और 'महात्मा गांधी हिज अपोस्टल्स' पुस्तक के लेखक वेद प्रकाश मेहता के अनुसार गांधी खानदान के लोग कई देशों में जीवन बीमा बेचने से लेकर अंतरिक्ष इंजीनियरिंग तक के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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