कुछ बुझा, अबूझ जीवन का यक्ष प्रश्न,
तंग गली, अंधकार भविष्य की उलझन,
चाह आगे बढ़ने की और मार्ग अवरुद्ध,
कैसे आगे बढ़ें, मार-काट, राजनीति,
सुबह से शाम, बस ऐसा मस्तिष्क में,
बस, अब और नहीं, जाए कहां, क्या करें,
सब हो जाए संतुष्ट
खोज़ में उलझ-उलझ उलझा मन।